Smt. Sonia Gandhi - Chairperson, UPA

प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी , विलास राव देशमुख जी , प्रदीप जैन जी , बी. के सिन्हा जी , देश के कोने कोने से आये उपस्थित अतिथि गण , बहनों एवं भाइयों . मुझे ख़ुशी हैं कि महात्मा गाँधी नरेगा सम्मेलन के मौके पर मैं यहाँ आप सब के बीच हूँ । इस सम्मेलन मे सामिल सभी प्रतिनिधियों को मैं स्वागत करती हूँ ।  इस एतिहासिक  और प्रमुख के लागू होने का ये पांचवां साल हैं । इस मौके पर मैं आप सब को मुबारकवाद देती हूँ ।

आज का सम्मेलन महात्मा गाँधी नरेगा के काम काज का मूल्यांकन करने का एक अवसर ह । हमें अपनी उपलब्धियां देखनी चाहिए और उनपर संतोष होना चाहिए। ऐसी के साथ स्पष्ट रूप से अपनी सीमाओं और कमियों का आत्मनिरीक्षण  करना चाहिए । और आगे की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए । जहाँ तक इस कार्यक्रम का सफलता का सवाल है हम सब जानते हैं कि गाँव के गरीब भाइयों कि सशक्तिकरण को इसने एक नयी दिशा दी है । ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार और कम रोजगार वाले घरों के लिए खास तौर से दलित और आदिवासी समुदायों के लिए ये जीवन रेखा हैं । और सामाजिक सुरक्षा के आधार के रूप मे माना जा रहा हैं।

मुझे इस बात की ख़ास तौर से ख़ुशी हैं कि जिन लोगों को इसका लाभ मिला हैं उनमे आधी संख्या महिलाओं कि हैं । इससे देश के कई क्षेत्रों मे, मज़बूरी मे गांवों से होने वाले पलायन को रोकने मे मदद मिली हैं । देहाती डाकघरों और बैंकों को भी इसका हिसाब किताब  रखने से नया प्रोत्साहन मिला है । कुल मिलाकर खेतों मे काम करने वाले मजदूरों को भी इस कार्यक्रम के वजह से ज्यादा मजदूरी मिलने लगी हैं । महात्मा गाँधी नरेगा कि एक विशेषता ये भी है कि इसने न केवल रोजगार पैदा किये हैं , बल्कि इसने हरित रोजगार (ग्रीन इम्प्लायमेंट ) पैदा किये हैं । जिससे प्राकृतिक संसाधनों का आधार जिवंत होता हैं । करीब 80 % काम जल संरक्षण , भूमि विकास , वृक्षारोपण और लघु सिचाई से सम्बंधित हैं।

ये केवल थोड़े समय की रोजगार योजना नहीं हैं। इससे ऐसी इस्थितियाँ पैदा होगी जिसके जरिये आने वाले समय मे स्थाई जीविका मिलेगी । इससे लम्बी समय से चली आ रही गरीबी की वजहों जैसे - सुखा वनों की कटाई , जमीन का उपजाऊ न रहना , बाढ़ से मिटटी का कटना और संपर्क मार्गों की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने मे मदद मिलेगी । ये सब इस योजना की सिर्फ मुख्य कुछ खासियत हैं। लेकिन इसी के साथ मैं आपनी कुछ चिंताएं भी आपके सामने रखना चाहती हूँ । ऐसी खबरें भी हैं कि इसका पैसा दुसरे कामों मे खर्च हो रहा हैं । फर्जी जॉब कार्ड , नकली मस्टररोल , मजदूरों कि फर्जी नामों कि सूचनाएं मिलती हैं । ऐसे काम और सामान जो केवल कागजों मे हैं या फिर बहुत ही निम्न स्तर के सामान कि खरीद और मजदूरी कार देर से भुगतान जैसी शिकायतें भी मिलती हैं । जिला स्तर के अधिकारी की नियुक्ति के बावजूद जनता की शिकायतें सुनने और उन्हें दूर करने की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह उतरदायी नहीं हैं । काम की जगह जो बुनियादी सुबिधायें होनी चाहिए उन्हें भी संतोष जनक नहीं कहा जा सकता हैं । इसकी वजह से उतनी महिलायें काम के लिए नहीं आती , जितनी आ सकती थीं ।

ये सब ऐसी कमियां हैं जिनके राज्य सरकार को निगरानी के साथ दूर करनी चाहिए और इनपर फ़ौरन और सख्त करवाई होनी चाहिए । और जाहिर हैं की केंद्र सरकार को भी राज्य को महात्मा गाँधी नरेगा के हर जरूरत को पूरा करने मे मदद करनी चाहिए । सोशल आडिट को और अधिक मजबूत करने की जरूरत हैं । मैं समझती हूँ कि अगर महिलाओं की स्वयं सहायता समूह और एनजीओ का सहयोग लिया जाय तो इसे और सशक्त किया जा सकता हैं । मुझे लगता हैं की महात्मा गाँधी नरेगा मे कृषि के विकास को आगे बढाने की और नये हरित क्रांति लाने की क्षमता हैं । इसके 40 ,000 करोड़  रूपये के बजट को छोटे और सीमांत किसानों की जमीन को ज्यादा उपजाऊ बनाने और पानी उपलब्ध कराने के काम मे इस्तेमाल करना चाहिए । क्योकि ऐसी किसान हमारी कुल खेती लायक जमीन के 80 % के मालिक हैं ।

अंत मे मैं आप सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों , महात्मा गाँधी नरेगा कार्यकर्ताओं , पोस्ट ऑफिस कर्मचारिओं और सरपंचों को बधाई देती हूँ जिन्हें यहाँ सम्मानित किया गया हैं । आप इस क़ानून की सफलता की जीती जागती मिशाल हैं । आपकी कड़ी मेहनत समर्पण और प्रतिबद्धता की वजह से यह योजना सफल हो रही हैं और हमारे करोड़ों लोगों का बेहतर भविष्य बन रहा हैं । मैं आपके सभी प्रयासों मे सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देती हूँ । और आप सब को यहाँ आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !


जय हिंद !